भारत में हथियार रखना केवल स्टेटस या सुरक्षा का सवाल नहीं है. आम नागरिक को भारत में अपने पास बंदूक रखने के लिए कानून के तहत लाइसेंस लेना होता है. लेकिन सवाल यह भी आता है कि एक व्यक्ति के पास कितनी बंदूकें हो सकती है और इसके लिए किन नियमों का पालन करना जरूरी है. आर्म्स एक्ट 1959 और आर्म्स बिल 2019 में इस मामले में कई नियम और दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं .
आम नागरिक और हथियारों की संख्या
पहले आम नागरिक को ज्यादा से ज्यादा तीन बंदूक रखने की इजाजत थी. लेकिन आम आर्म्स बिल 2019 में बदलाव के बाद आम नागरिक केवल दो बंदूक ही अपने पास रख सकते हैं. जिनके पास पहले से तीन हथियार थे उन्हें एक्स्ट्रा बंदूक पुलिस के पास जमा करानी होती है. इसके अलावा किसी भी एक्स्ट्रा हथियार के लिए नए लाइसेंस के अलग प्रक्रिया होती हैं.
निशानेबाजों और प्रोफेशनल्स के लिए नियम
राष्ट्रीय और राज्य स्तर के निशानेबाजों के लिए कुछ अलग नियम लागू है. नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सिफारिश के आधार पर उन्हें प्रतियोगिता और परीक्षण के लिए ज्यादा हथियार रखने की अनुमति है. वहीं अवार्ड विजेता निशानेबाजों के लिए कोई सीमा नहीं है, जबकि सामान्य प्रतियोगिता में भाग लेने वाले निशानेबाज ज्यादा से ज्यादा 10 हथियार रख सकते हैं. वहीं प्रत्येक हथियार के लिए एनआरएआई से सिफारिश पत्र लेकर लाइसेंसिंग विभाग में आवेदन करना जरूरी होता है.
कितना है गोलियों का कोटा
हथियार के साथ गोलियों की संख्या पर भी नियम बने हुए हैं. आम लाइसेंस धारक एक समय में 100 और सालाना ज्यादा से ज्यादा 200 गोलियां खरीद सकते हैं. वहीं निशानेबाजों के लिए प्रतियोगिता और परीक्षण के हिसाब से यह कोटा बढ़ाया गया है. इसमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में क्वालीफाई करने वाले निशानेबाजों को सालाना एक लाख गोलियों का कोटा मिलता है, जबकि राज्य स्तर के प्रतियोगियों के लिए यह कोटा 50 हजार है.
नियमों का उल्लंघन करने पर सजा
हथियार या गोलियों का गलत इस्तेमाल जैसे कि दूसरों को डराने के लिए हथियार का उपयोग करने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. वहीं चुनाव या विशेष अवसरों पर प्रशासन के आदेश पर हथियार थाने या पुलिस लाइन में जमा करवाने होते हैं. वर्तमान में बंदूक लाइसेंस की अवधि 5 साल है. इसके अलावा लाइसेंस धारकों को केवल एक ही लाइसेंस रखना होता है अगर किसी के पास दो या उससे ज्यादा हथियार होते हैं तो उन पर कार्रवाई हो सकती है.
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