भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अलग होने के बाद कभी भी ठीक नहीं रहे. दोनों देश काफी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरे हैं, लेकिन इसकी पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान की मानी जा सकती है. पाक आए दिन भारत के खिलाफ साजिश करता रहा है. वह आतंकवादियों को शरण देकर कई बार हमले की कोशिश कर चुका है, लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर भारत ने 1984 में एक फैसला ले लिया होता तो पाकिस्तान की कहानी लगभग खत्म हो चुकी होती.
बात करीब चार दशक पहले की है. भारत और पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध हो चुके थे और पाक खुद को परमाणु संपन्न बनाने की कोशिश में लगा था. इस बात की खबर भारत को अच्छी तरह से थी. भारत के साथ-साथ इजरायल भी यह जानता था. इजरायल ने उस वक्त भारत को ऐतिहासिक ऑफर दिया था. अगर भारत ने वह ऑफर मान लिया होता तो आज स्थिति कुछ और होती.
इजरायल ने भारत को क्या दिया था ऑफर
इजरायल ने भारत को ऑफर दिया था कि वह चाहे तो पाकिस्तान पर अटैक करके कहानी खत्म की जा सकती है. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने इस पर काफी विचार किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से बात बन नहीं पायी. भारत ने अंतिम समय पर इजरायल का ऑफर ठुकरा दिया.
इजरायल ने बना लिया था पूरा प्लान
एड्रियल लेवी और कैथरीन स्कॉट-क्लार्क की एक किताब है, जिसका नाम ‘डिसेप्शन’ है. इस बुक में इस बात का जिक्र है कि 1980 की शुरुआत में इजरायल, पाक के न्यूक्लियर प्रोग्राम को बड़ा खतरा समझ रहा था. उसने भारत को 1984 में एक ज्वाइंट ऑपरेशन का ऑफर दिया था. इसके तहत इजरायल के F-16 और F-15 फाइटर जेट्स भारत के जामनगर से पाकिस्तान के काहुटा न्यूक्लियर सेंटर पर अटैक करेंगे. भारत को अपना जगुआर भी इस मिशन पर भेजना होगा.
जब भारत को कैंसिल करना पड़ा प्लान
तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी पहले तो इसके लिए तैयार हुईं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते प्लान कैंसिल करना पड़ा. इजरायल चाहता था कि जैसे 1981 में इराक के न्यूक्लियर रिएक्टर पर हमला किया था, उसी तरह पाकिस्तान पर भी अटैक किया जाए, लेकिन अंतिम समय में बात टल गई.
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