भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार (13 जुलाई, 2025) को कहा कि एक या दो तिमाही में अमेरिकी टैरिफ सम्बन्धी चुनौतियां खत्म हो जाएंगी. निजी क्षेत्र से और अधिक प्रयास करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि देश अन्य दीर्घकालिक चुनौतियों से जूझ रहा है.
वित्त वर्ष 2025 में विकास दर में आई मंदी, जो वित्त वर्ष 2024 के 9.2 प्रतिशत से घटकर 6.5 प्रतिशत रह गई, इस सवाल पर नागेश्वरन ने कहा कि कृषि नीतियां वास्तविक जीडीपी बढ़त में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती हैं.
प्रभावित सेक्टर को लेकर बातचीत जारी
अमेरिकी टैरिफ को लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि हीरा और जेवर, कपड़े जैसे सेक्टर में पहले टैक्स का असर पड़ने के बाद दूसरे और तीसरे टैक्स का असर पड़ेगा, जिसका सामना करना काफी मुश्किल है. सरकार इस स्थिति को जानती है और प्रभावित सेक्टर को लेकर बातचीत जारी है. आने वाले दिनों में सरकार अपनी नीतियों पर बात करेगी, लेकिन अभी सब्र रखना होगा.
व्यापार वार्ता को लेकर इस महीने अमेरिकी अधिकारियों के भारत आने की अटकलों को लेकर अनंत नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में होने वाली बैठक और बातचीत इस नतीजे को प्रभावित कर सकती है.
एक या दो तिमाहियों में सुधरेगी स्थिति
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को लेकर उन्होंने कहा कि इस समय विश्व स्तर पर हालात बहुत अस्थिर हैं और संबंध गतिरोध की ओर बढ़ रहे हैं. भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के बारे में बात करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मौजूदा स्थिति एक या दो तिमाहियों में सुधर जाएगी और लगता नहीं है कि इसका भारत पर कोई खास असर होगा, लेकिन अभी कुछ समय के लिए प्रभाव जरूर पड़ेगा.
नागेश्वरन ने कहा कि कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला क्यों लिया? क्या ये ऑपरेशन सिंदूर का नतीजा है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति है? टैरिफ संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा हमें और भी कई चुनौतियों से अनजान नहीं होना चाहिए, जिसमें तकनीकि बुद्धिमत्ता का प्रभाव, महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक देश पर निर्भरता और सप्लाई को मजबूत करना शामिल है.
निजी क्षेत्र को लेकर काम करना जरूरी
नागेश्वरन ने भारतीय उद्योग जगत को लेकर कहा, ‘आने वाले सालों में बड़ी रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए हमें निजी क्षेत्र को लेकर काफी सोचना होगा. अगली तिमाही के बजाय लम्बे समय तक इसको लेकर काम करना होगा, जिसको लेकर अभी हमारे सामने चुनौतियां आ रही हैं. सरकार के प्रयास के बाद अब निजी क्षेत्रों को अपनी भागीदारी को दिखाना होगा.
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