केरल में प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है. इस साल अब तक इसके 69 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 19 लोगों की मौत हो चुकी है. केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि राज्य में इस साल कुछ मामले जरूर सामने आए हैं, लेकिन इसका कोई समूह (क्लस्टर) प्रकोप नहीं हुआ है.
मंत्री ने बताया कि साल 2025 में इस दुर्लभ और जानलेवा दिमागी संक्रमण के अब तक 69 मामले और 19 मौतें दर्ज की गई हैं. ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘इस साल केवल कुछ ही मामले सामने आए हैं, कोई समूह में फैलाव नहीं हुआ है. 2024 में एक क्लस्टर पाया गया था, क्योंकि लोग एक ही पानी के स्रोत का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन 2025 में ऐसा कोई मामला नहीं है.’
इस कारण होता है PAM संक्रमण
केरल का स्वास्थ्य विभाग प्राथमिक अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) के मामले आने के बाद सतर्कता बरत रहा है. बता दें कि PAM मस्तिष्क का एक बहुत ही दुर्लभ और घातक अमीबिक संक्रमण हैं, जो नेगलेरिया फाउलेरी अमीबा के कारण होता है. इसे ‘दिमाग खाने वाला अमीबा (brain-eating amoeba)’ कहा जाता है.
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, केरल में इस साल अगस्त और सितंबर में इस बीमारी के कारण कई मौतें दर्ज की गई हैं. इसी के कारण स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और केरल स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर पूरे राज्य में निगरानी बढ़ा दी है. अधिकारियों ने बताया कि इस साल जल स्रोत से बीमारी फैलने का केस नहीं आया है.
कैसे फैलता है PAM संक्रमण?
स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि साल 2023 में निपाह वायरल के भयंकर प्रकोप के बाद केरल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर किया गया है. चिकित्सकों को मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के हर मामले की अमीबिक एन्सेफलाइटिस के लिए जांच करने और उसका तुरंत इलाज करने के लिए कहा गया है. एक्सपर्ट के अनुसार, PAM तब होता है, जब नेगलेरिया फाउलेरी नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. शरीर में यह प्रवेश दूषित मीठे पानी में तैरने या नहाने से होता है यानि ये पानी पीने से नहीं फैलता.
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