पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन और हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने दावा किया है कि उन्हें हाउस अरेस्ट (नजरबंद) किया गया है. तीनों ही नेताओं ने कहा कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल गनी भट के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए सोपोर जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया.
90 वर्षीय अब्दुल गनी भट का लंबी बीमारी के बाद बुधवार (17 सितंबर) शाम सोपोर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया था. महबूबा मुफ्ती ने एक्स हैंडल पर प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि यह गिरफ्तार जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र पर हमले का सबूत है.
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह तेज़ी से स्पष्ट होता जा रहा है कि बीजेपी की कश्मीर में शांति या सुधार में “कोई रुचि नहीं” है. उन्होंने आगे कहा, “इसके बजाय, वे इस क्षेत्र को लगातार अशांति की स्थिति में रखने के लिए दृढ़ हैं और देश के बाकी हिस्सों में राजनीतिक लाभ के लिए दर्द और अशांति को हथियार बना रहे हैं. यह निंदनीय दृष्टिकोण न केवल गैर-ज़िम्मेदाराना है; बल्कि खतरनाक और पूरी तरह से निंदनीय भी है.”
The decision to place the political leadership under house arrest today, simply to stop us from visiting Sopore to offer condolences on the demise of Professor Abdul Gani Bhat, lays bare the harsh and undemocratic reality in Jammu and Kashmir.
What unfolded at Hazratbal Dargah… pic.twitter.com/M0BmZ276oM
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) September 18, 2025
क्या बोले मीरवाइज उमर फारूक?
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने भी दावा किया कि उन्हें बुधवार देर रात नज़रबंद कर दिया गया था. मीरवाइज ने एक्स पर कहा, “मुझे शब्दों से परे दुख है कि अधिकारियों ने प्रो. एसबी के परिवार को जल्दबाजी में उनका ‘जनाज़ा’ पूरा करने के लिए मजबूर किया. मुझे मेरे घर में बंद कर दिया गया है और उनकी अंतिम यात्रा में उनके साथ चलने का अधिकार नहीं दिया जा रहा है.”
मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि भट के साथ उनकी दोस्ती और मार्गदर्शन का 35 साल का रिश्ता रहा है. उन्होंने कहा, “कई अन्य लोग भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए तरस रहे थे. उनके ‘जनाज़ा’ में शामिल होने और उन्हें अंतिम विदाई देने के सुकून से भी वंचित रहना एक असहनीय क्रूरता है.”
पूर्व मंत्री और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने कहा, “मुझे प्रोफ़ेसर गनी साहब के पैतृक गाँव बोटिंगू जाने से रोकने के लिए नज़रबंद कर दिया गया है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि इसकी क्या ज़रूरत है. प्रोफेसर साहब एक शांतिवादी थे और बहुत पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे. अंतिम विदाई एक ऐसी चीज़ है जिसके हम सभी हक़दार थे.”
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