कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार (23 सितंबर, 2025) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो के भारत पर टैरिफ को लेकर दिए हालिया बयानों पर कड़ा जवाब दिया. शशि थरूर ने कहा कि जब दो देशों के बीच करीबी आ रही हो, तब ऐसी भाषा के लिए कोई जगह नहीं है.
दरअसल, व्हाइट हाउस के ट्रेड और मैन्युफैक्चरिंग सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर हाल ही में हमला करते हुए उसे ‘टैरिफ का महाराजा’ और ‘रूस का लॉन्ड्रोमैट’ कहा था. इसके साथ उन्होंने यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ तक करार दिया था. नवारो ने कहा था कि ‘ब्राह्मण’ भारत के लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं.
पीटर नवारो के बयान को लेकर क्या बोले शशि थरूर?
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ भारत में बेहद नकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर चुके हैं और इसके साथ ही ट्रंप के बयानों और ट्वीट्स की भाषा भी काफी अपमानजनक रही है.
शशि थरूर ने कहा, ‘इसके बाद उनके सलाहकार पीटर नवारो के बेहद आपत्तिजनक बयानों ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया है. अगर 30 साल पूराने रिश्ते में कोई बड़ी समस्या नहीं है और दोनों देश और करीब आ रहे हैं, तो आप भारत के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं? इस बात की कहीं से भी सराहना नहीं की जा सकती है.‘
#WATCH | Speaking on tariff imposed by the US, in an interview to ANI, Congress MP Shashi Tharoor says, “…Mr Trump has this idea that tariffs are the magic instrument to solve a number of his problems…The unfairness of this has created a very strong backlash in India and the… pic.twitter.com/xjuuXXGSTb
— ANI (@ANI) September 23, 2025
डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कांग्रेस नेता ने क्या कहा?
इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने उन बातों को गिनाया जहां-जहां गलतियां हुईं. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को एक तरह के जादुई हथियार मानते हैं, जो अमेरिका के घाटे को कम करने और उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा को आगे बढ़ाने जैसी कई समस्याओं का हल निकाल सकता है.
उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति का इरादा आयात किए गए सामानों को और महंगा बनाने का है ताकि अमेरिकी कंपनियां अपने देश में ही उत्पादन करें. उन्हें लगता है कि जिन सामानों का निर्माण पहले अमेरिका में ही होता था, उसे अब आयात किया जा रहा है. इसलिए वे चाहते हैं कि आयात किए गए सामान महंगे हो जाएं, जिससे अमेरिकी निर्माता अपने देश में उत्पादों को निर्माण करें और अमेरिकी मजदूरों को रोजगार मिले, जो उनका वोट बैंक हैं.
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