बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने BPL की फ्रैंचाइजी चिट्टागोंग किंग्स (Chittagong Kings) को निलंबित कर दिया है. टीम के पूर्व मालिक एसक्यू स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड नियमित रूप से वित्तीय उल्लंघन करते रहे, जिसके बाद बोर्ड ने सम्झौता समाप्त करने के बाद इस फ्रैंचाइजी पर बैन लगाया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि चिट्टागोंग किंग्स ने 46 करोड़ टाका (बांग्लादेशी मुद्रा) की बकाया राशि नहीं चुकाई थी.
BCB ने बताया कि चिट्टागोंग किंग्स ने 46 करोड़ टाका, लगभग 33.1 करोड़ भारतीय रुपये की बकाया राशि नहीं चुकाई है. इस फ्रैंचाइजी पर बांग्लादेश प्रीमियर लीग के पहले 2 सीजन (2012 और 2013) के अलावा 2025 सीजन और 12 साल का ब्याज बकाया है. बोर्ड का कहना है कि एसक्यू स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट लिमिटेड लगातार वित्तीय और संविदात्मक दायित्वों का उल्लंघन करती रही. इनमें फ्रैंचाइजी की फीस, टैक्स के अलावा खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स की सैलरी रोकी गई. कंपनी को कई बार इस बारे में अवगत कराया गया, फिर भी पैसे का भुगतान नहीं किया गया.
सितंबर 2024 में एक सेटलमेंट एग्रीमेंट हुआ था, उसका भी उल्लंघन किया गया. आखिरकार बोर्ड ने 22 जुलाई, 2025 को कंपनी के साथ अपने समझौते को समाप्त कर दिया था. 2025 BPL सीजन की ही बात कर लें तो चिट्टागोंग किंग्स फ्रैंचाइजी हेड कोच शॉन टैट, कई खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की की पूरी तंख्वाह भी नहीं दे पाई थी.
यहां तक कि लीग के ब्रांड एम्बेसडर शाहिद अफरीदी को भी पूरा पैसा नहीं मिल पाया. चिट्टागोंग किंग्स टीम के मालिक समीर क्वादर चौधरी ने अफरीदी का पैसा ना चुकाए जाने को पर्सनल मामला बताया था. होस्ट यशा सागर को भी पूरा पैसा नहीं मिल पाया, जिसमें मामला लीगल नोटिस भेजने तक आगे बढ़ गया था.
वैसे तो यह कोई मैच फिक्सिंग का मामला नहीं है, लेकिन सालों पहले इंडियन प्रीमियर लीग में CSK और राजस्थान रॉयल्स फ्रैंचाइजी पर बैन लगाया गया था. उस घटना ने फ्रैंचाइजी क्रिकेट को हिलाकर रख दिया था.
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