15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हकुमत से भारत देश आजाद हुआ था, लेकिन अंग्रेज जाते जाते भारत का बंटवारा कर पाकिस्तान देश बना दिया था. देश के आजाद होने पर लोगों खुशी मना रहे थे लेकिन वहीं कई परिवार बंटवारे के चलते उजड़ भी गए थे.
बंटवारे की एक ऐसी ही दास्तान सरहदी जिला फिरोजपुर के गांव बाजिदपुर के रहने वाले पति पत्नी भगवान और रछपाल कौर की है, जिनसे बात की तो उन्होंने बताया कि उस समय सात दिन में ही हालत बद से बदतर बन गए थे. आज जब उस समय को याद करते है तो आंखों के सामने वह मंजर आ जाता है.
भगवान सिंह ने अपनी दास्तान बताते हुए कहा कि उनका जन्म 1939 में पाकिस्तान के जिला लाहौर में गांव औलख में हुआ. उन्होंने बताया कि बड़ा अच्छा माहौल था, सभी जातियों के लोग मिलजुल कर रहते थे, जब भारत देश आजाद हुआ तो उनकी उम्र 8 साल के करीब थी. उन्होंने बताया कि सात दिन में ही माहौल खराब हो गया.
मुसलमान परिवारों को दे दिया था समान
उन्होंने कहा कि हम बैलगाड़ी पर सवार को कर काफिले के रूप में निकले और उस समय डर का माहौल था, उन्होंने कहा हमारे काफिले पर हमला होने लगा था, लेकिन आर्मी आ गई. कई बार बारिश हुई जिसके चलते हम बच गए. उन्होंने बताया कि हमारी पाकिस्तान में काफी जमीन थी, काफी सामान था लेकिन हमें इस और आ कर कुछ नहीं मिला.
उन्होंने आगे बताया कि हमने अपने समान वहीं मुसलमान परिवारों को दे दिया था, जब हम रास्ते में बैल गाड़ियों पर भारत जा रहे थे तो रास्ते में बारिश होती थी तो हम बैलगाड़ी के नीचे खाना खाते थे, उस समय के हालात काफी बद से बदतर थे, हमारा सारा परिवार बच गया था और हम इस और आ गए 1961 में मेरी शादी हुई.
ट्रेन के जरिए पाकिस्तान से आए थे फिरोजपुर
वही भगवान सिंह की पत्नी रछपाल कौर ने बताया कि बंटवारे के समय उनकी उम्र तीन साल की उम्र थी और पाकिस्तान के चुनी में जन्म हुआ था, वहां चारों तरफ दरवाजे होते थे, बंटवारे के समय ट्रेन के जरिए हम पाकिस्तान से भारत फिरोजपुर आए थे, उन्होंने बताया कि में रोटी नहीं खाई, पांच साल पेड़े ही खाती थी.
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