चीन के विदेश मंत्री वांग यी बुधवार (20 अगस्त, 2025) को अपनी भारत यात्रा खत्म करने के बाद अफगानिस्तान की राजधानी काबूल पहुंचे हैं, जहां पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी पहुंचेंगे. वांग ने भारत की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली के दौरे के बाद सीधे इस्लामाबाद का दौरा नहीं किया. बल्कि वे काबुल में होने वाले चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की त्रिपक्षीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे.
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार भारत के दोनों पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों की एक साथ मेजबानी करने वाला है. हालांकि, काबुल में होने वाले इस त्रिपक्षीय सम्मेलन में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के काबुल तक विस्तार और आर्थिक सहयोग को लेकर चर्चा होने वाली है. वहीं, भारत भी काबुल में होने वाले इस त्रिपक्षीय बैठक पर अपने नजरें टिकाए बैठा है.
क्या चाहता है अफगानिस्तान?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान चार साल पहले फिर से सत्ता में आया, जिसके बाद तालिबान की अगुवाई में होने वाली यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी. चीन और पाकिस्तान के साथ होने वाले इस त्रिपक्षीय सम्मेलन के माध्यम से तालिबानी सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय वैधता की कोशिशों को और मजबूत करने में जुटी है. अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता हाफिज जिया अहमद ने एक एक्स पोस्ट में कहा कि तीनों देशों के बीच इस बैठक में राजनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी.
चीन ने अफगानिस्तान को CPEC में जोड़ने का रखा था प्रस्ताव
काबुल से पहले इन तीनों देशों के बीच पांचवां त्रिपक्षीय सम्मेलन चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित किया गया था और बीजिंग सम्मेलन में ही अफगानिस्तान को CPEC में शामिल करने पर सहमति बनी थी. हालांकि, चीन ने साल 2017 के दिसंबर महीने में पहली बार अफगानिस्तान को CPEC में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव में चीन पाकिस्तान के पेशावर से अफगानिस्तान की राजधानी काबुल तक एक मोटर-वे बनाना चाहता है. वहीं, चीन के इस प्रस्ताव पर तालिबान सरकार ने भी सहमति जताई है.
त्रिपक्षीय बैठक भारत के लिए क्यों है चिंता का कारण?
भारत शुरुआत से ही चीन और पाकिस्तान के इस CPEC को पुरजोर विरोध करता आ रहा है. चीन का यह कॉरिडोर PoK से होकर गुजरता है, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है. ऐसे में अफगानिस्तान के इस कॉरिडोर प्रोजेक्ट में शामिल होने से पाकिस्तान PoK पर अपना दावा मजबूत कर सकता है. जो भारत के लिए चिंता का कारण है.
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