भारत के संविधान में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे ऊंचे पदों पर चुनाव के लिए आमतौर पर राजनीतिक अनुभव वाले लोग चुने जाते हैं, लेकिन इतिहास में कई बार ऐसा भी हुआ है जब न्यायपालिका से जुड़े यानी पूर्व जजों को राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतारा गया हो, हाल ही में इस परंपरा को एक बार फिर से देखा जा रहा है जब इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया है. वहीं एनडीए ने तमिलनाडु से सांसद और वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है. लेकिन बी. सुदर्शन रेड्डी कोई पहले जज नहीं हैं जो इस तरह के चुनाव में शामिल हुए हों. इससे पहले भी कई पूर्व जज राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के लिए मैदान में उतर चुके हैं. तो आइए जानते हैं कब-कब भारत में ऐसा हुआ है.
बी. सुदर्शन रेड्डी कौन हैं?
बी. सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं. वे तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले से आते हैं. उन्होंने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी न्यायिक सेवा दी है. हाल ही में तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए जाति सर्वेक्षण की समिति की कमान भी उन्हीं को दी गई थी. बी. सुदर्शन रेड्डी राजनीति से कभी सीधा जुड़ाव नहीं रहा, इसलिए विपक्ष ने इन्हें निष्पक्ष चेहरा मानते हुए उम्मीदवार बनाया गया है.
ये जज भी लड़ चुके हैं राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति का चुनाव
कई पूर्व जजों को अलग-अलग पार्टियों ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है. जैसे, जस्टिस हंस राज खन्ना सुप्रीम कोर्ट के एक फेमस और सम्मानित जज थे. उन्होंने आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों की रक्षा में ऐतिहासिक फैसला दिया था. 1982 में कांग्रेस ने ज्ञानी जैल सिंह को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया था. इसके जवाब में 9 विपक्षी दलों ने जस्टिस हंसराज खन्ना को अपना उम्मीदवार बनाया था. हालांकि वो चुनाव हार गए, लेकिन उनकी निष्पक्ष छवि और संविधान के प्रति निष्ठा को आज भी याद किया जाता है. इसके अलावा जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को इंडिया ब्लॉक ने 2025 में उन्हें अपना संयुक्त उम्मीदवार बनाया है. ये कदम राजनीतिक दलों से अलग जाकर गैर-राजनीतिक नेतृत्व को सामने लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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