अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत, चीन और ब्राजील पर लगाए गए टैरिफ और ब्रिक्स को लेकर दिए गए बयान के बाद से दुनिया की राजनीति में बदलाव देखने को मिल रहा है. हालांकि ये सब कुछ इतनी जल्दी होगी इसका अंदाजा ट्रंप को भी नहीं होगा. ट्रंप की टैरिफ नीति एशिया की दो बड़ी शक्ति भारत और चीन को एक मंच पर खड़ा कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करने वाले हैं. इस दौरान एससीओ के देश एक संयुक्त घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर करेंगे.
कितने देशों के नेता एससीओ समिट में पहुंचेंगे?
चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को अधिकारिक तौर पर 20 से अधिक देशों के नेताओं और 10 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों की लिस्ट जारी की है, जो एससीओ सम्मेलन में शिरकत करने वाले हैं. चीन की डिप्टी विदेश मंत्री लियू बिन ने पुष्टि की है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.
‘ज्यादा से ज्यादा देशों को एकजुटता दिखाने जरूरत’
अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के बाद यह पुतिन की पहली चीन यात्रा होगी. वहीं पीएम मोदी सात साल बाद चीन जाएंगे. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (ASEAN) के महासचिव काओ किम होर्न भी इस सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे. लियू बिन ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्थिति जितनी अशांत और उलझी हुई होती जाएगी उतने ही अधिक देशों को एकजुटता और सहयोग को मजबूत करने की जरूरत होगी.”
साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट के मुताबिक अमेरिका पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “आज की दुनिया में भी एक देश अपने प्रभुत्व और सत्ता की राजनीति की पुरानी मानसिकता को सबसे ऊपर रखता है. कुछ देश अपने हितों को दूसरों से ऊपर रखने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे विश्व शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है.”
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