महाराष्ट्र में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गणेशोत्सव के दौरान शहर में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनज़र मनोज जरांगे पाटील को मुंबई में बिना पूर्व अनुमति के आंदोलन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा कि लोकतंत्र और असहमति आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन आंदोलन केवल निर्धारित स्थल पर ही किया जा सकता है.
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मुंबई की दिनचर्या बाधित न हो, इसके लिए जरांगे पाटील को नवी मुंबई के खारघर इलाके में वैकल्पिक जगह देने का निर्णय राज्य सरकार ले सकती है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के लिए परवानगी मिलने के बाद ही शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया जा सकता है.
इजाजत के लिए करें आवेदन- कोर्ट
हाईकोर्ट ने आंदोलनकारियों को यह छूट दी है कि वे प्रशासन से इजाजत के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके बाद राज्य सरकार को अधिकार है कि वह कानून की धाराओं के अनुसार फैसला ले. अदालत ने साफ कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थान को अनिश्चित काल तक घेरा नहीं जा सकता.
‘आंदोलन कानून व्यवस्था में डाल सकता है असर’
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया कि गणेशोत्सव के दिनों में मुंबई पुलिस पूरी तरह से कानून और व्यवस्था बनाए रखने में व्यस्त रहती है. ऐसे समय पर आंदोलन या धरना प्रदर्शन शहर की शांति और व्यवस्था पर असर डाल सकता है. यह सुनवाई एमी फाउंडेशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर हुई, जिसमें जरांगे पाटील के प्रस्तावित आंदोलन का विरोध किया गया था.
कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं आंदोलन- कोर्ट
यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मारणे की खंडपीठ के समक्ष आया. अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आंदोलन का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक जीवन और कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं हो सकता.
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