पूर्व राज्यसभा सांसद और अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह ने 2002 के गुजरात दंगों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड से उपजे गुस्से का नतीजा था और पीएम मोदी ने इसे अच्छे से संभाला था. तरलोचन सिंह ने इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी की भागीदारी की सराहना की.
उन्होंने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी इसे नहीं संभालते तो गुजरात जल जाता. ट्रेन मे जले लोगों के परिजन उनके शव अपने गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन मोदी जी ने उनका अंतिम संस्कार वहीं करा दिया. सोचिए अगर लोग अपने परिजनों के शव गांव ले जाते तो अन्य लोगों में कितना गुस्सा भड़कता और गुजरात जल जाता.
‘दंगों में सरकार की कोई भूमिका नहीं’
एएनआई के साथ बातचीत के दौरान बुधवार (27 अगस्त, 2025) को तरलोचन सिंह ने कहा कि गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और ऐसा होने से रोक दिया. साल 2002 का गुजरात दंगा जनता के गुस्से का परिणाम था और उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा कि गुजरात का दंगा दिल्ली में हुए 1984 के दंगों की तरह प्रायोजित नहीं था. साल 2002 में मैं अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष था.
बता दें कि साल 2002 के गुजरात दंगों के सीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे और तरलोचन सिंह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे. उन्होंने कहा कि दंगा होने के बाद सबसे पहले मैं वहां पहुंचा था और मैंने लोगों से पूछताछ की, लेकिन कोई इस घटना के बारे में नहीं जानता था.
अहमदाबाद तक ही सीमित रहा दंगा
पीएम मोदी की तारीफ करते हुए तरलोचन सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी का रोल गुजरात सीएम के रूप में सराहनीय था. मोदी जी ने तय किया था कि मारे गए सभी कारसेवकों का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए. अगर शव गांवों में पहुंचते तो लोगों में कितना गुस्सा भड़कता, हम सिर्फ इसकी कल्पना ही कर सकते हैं. नरेंद्र मोदी के साहस का ही परिणाम है कि दंगे अहमदाबाद और उसके आसपास के इलाके में ही हुए और पूरा गुजरात बच गया.
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