राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पहली बार अमेरिका की ओर से भारत पर लागू किए 50 फीसदी टैरिफ पर प्रतिक्रिया दी है. मोहन भागवत ने कहा कि हमारा आत्मनिर्भर होना जरूरी है. पीएम मोदी की ओर से कही गई बात का समर्थन करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हमें स्वदेशी को बढ़ावा देना होगा.
100 वर्ष की संघ यात्रा पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मोहन भागवत ने कहा कि पर्यावरण में इन तीन चीजों पर काम करना होगा- पानी बचाओ, सिंगल यूस प्लास्टिक हटाओ और पेड़ लगाओ. सामाजिक समरसता को लेकर काम करना होगा. मनुष्य को लेकर हम जाति के बारे में सोचने लगते हैं. इसको मन से खत्म करना होगा.
मंदिर, पानी श्मशान सबके लिए: मोहन भागवत
सरसंघचालक ने कहा कि मंदिर, पानी, श्मशान सबके लिए हैं उसमें भेद नहीं होना चाहिए. आत्मनिर्भरता सब बातों की कुंजी है. अपना देश आत्मनिर्भर होना चाहिए. आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी के उपयोग को प्राथमिकता दें. देश की नीति में स्वेच्छा से अंतर्राष्ट्रीय व्यवहार होना चाहिए, दबाव में नहीं. यही स्वदेशी है.
नींबू की शिकंजी पी सकते हैं, कोका कोला क्यों चाहिए: भागवत
उन्होंने कहा कि नींबू की शिकंजी पी सकते हैं, कोका कोला और स्प्राइट क्यों चाहिए, घर पर अच्छा खाना खाओ पिज्जा की क्या जरूरत. सामाजिक समरसता का कार्य कठिन होते हुए भी, करना ही होगा; उसके अलावा कोई उपाय नहीं. अपने आसपास के वंचित वर्ग में मित्रता करना. मंदिर पानी और शमशान में कोई भेद न रहे. इस आधार पर किसी को कोई रोकटोक ना हो.
हम रहें या न रहें, भारत रहना चाहिए: आरएसएस चीफ
कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि जो अपने देश में है उसको प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जो अपने पास नहीं उसके लिए विदेश से लें. हम रहें या ना रहे ये भारत रहना चाहिए. उन्होंने अपील की है कि आप सब लोग आकर संघ को देखिए, संघ को समझिए. शुद्ध सात्त्विक प्रेम ही संघ है, यही कार्य का आधार है.
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