भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री डॉ. रघुराम राजन ने अमेरिका के भारतीय एक्सपोर्ट पर लगाए गए भारी टैरिफ को बेहद चिंताजनक बताया है. उन्होंने भारत के लिए किसी एक व्यापारिक साझेदार देश पर निर्भरता कम करने के लिए इसे वेकअप कॉल बताया है.
बुधवार से लागू हुए 50 प्रतिशत टैरिफ, जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त जुर्माना भी शामिल है, इसे लेकर बोलते हुए डॉ. राजन ने चेतावनी दी कि आज की वैश्विक व्यवस्था में बिजनेस, इन्वेस्टमेंट और फाइनेंस को तेजी से हथियार बनाया जा रहा है इसलिए भारत को सावधानी से कदम उठाने चाहिए.
टैरिफ को भारत के लिए बताया चेतावनी
इंडिया टुडे को बुधवार (27 अगस्त, 2025) को दिए एक इंटरव्यू में राजन ने कहा कि यह एक चेतावनी है कि हमें किसी एक देश पर बहुत अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए. हमें अब पूर्व, यूरोप ओर अफ्रीका की ओर देखना चाहिए और अमेरिका के साथ आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन ऐसे सुधारों को लागू करना चाहिए जो हमें अपने युवाओं को रोजगार देने के लिए आवश्यक 8-8.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने में मदद करें.
रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर ट्रंप प्रशासन ने ये कठोर टैरिफ लगाया है, जबकि रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक चीन और यूरोप है, जो मॉस्को से बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पाद खरीद रहा है. उन पर ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
‘रूसी तेल आयात पर फिर से विचार करने की जरूरत’
राजन ने सुझाव दिया कि भारत रूसी तेल आयात पर अपनी नीति का पुनर्मूल्यांकन करे. उन्होंने कहा कि हमें यह पूछना होगा कि किसे फायदा हो रहा है और किसे नुकसान. रिफाइनर अत्यधिक मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन निर्यातक टैरिफ के माध्यम से इसकी कीमत चुका रहे हैं. यदि लाभ बहुत अधिक नहीं है तो शायद यह विचार करने योग्य है कि क्या हमें ये खरीदारी जारी रखनी चाहिए.
व्हाइट हाउस के ट्रेड ए़डवाइजर के आरोपों पर क्या कहा
व्हाइट हाउस के ट्रेड ए़डवाइजर पीटर नवारो के भारत पर रूसी तेल के जरिए मुनाफाखोरी करने के आरोपों पर राजन ने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी समय राष्ट्रपति (ट्रंप) ने यह तय कर लिया था कि भारत एक ऐसा देश है जो उनके बताए नियमों के अनुसार नहीं चल रहा है और उसे अलग-थलग कर दिया जाना चाहिए. नवारो बिना अनुमति के फाइनेंशियल टाइम्स में नहीं लिखेंगे.
ट्रंप के लंबे समय से सहयोगी रहे नवारो ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारतीय रिफाइनर रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देते हुए पैसा कमा रहे हैं. उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें तेल की जरूरत नहीं है. यह एक रिफाइनिंग मुनाफाखोरी योजना है.
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