उत्तर प्रदेश के मथुरा में इन दिनों यमुना नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, पिछले चार दिनों से लगातार बढ़ते जलस्तर ने शहर और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. वहीं आज सोमवार (1 सितंबर) की शाम 7 बजे यमुना का जलस्तर 166.26 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान 166 मीटर से 26 सेंटीमीटर ऊपर है. चेतावनी स्तर 165.20 मीटर को पार करते ही प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है. नदी के किनारे बसी कॉलोनियां, गांवों के लिंक रोड और खेत पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे हजारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
जिला प्रशासन ने विश्राम घाट, प्रयाग घाट और वृंदावन के घाटों पर स्नान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि अधिकांश घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं. यमुना के बढ़ते जलस्तर से सबसे ज्यादा प्रभावित जयसिंहपुरा, कालिंदी विहार, भक्ति विहार, श्याम नगर, मोहिनी नगर और वृंदावन की दर्जनों कॉलोनियां हैं. यहां सड़कों पर 3-4 फीट तक पानी भर गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया. लोग ट्यूब या नावों का सहारा लेकर घरों से बाहर निकल रहे हैं.
इसके अलावा नौहझील-शेरगढ़ रोड पर पानी की तेज धार ने सड़कें बहा दीं हैं. बलदेव, महावन तहसील के अकोष, कैलाश और छिनपारई जैसे गांवों में स्थिति और गंभीर है. यहां खेतों में खड़ी धान, बाजरा, ज्वार, मूंगफली और हरी सब्जियां पूरी तरह डूब चुकी हैं. सैकड़ों बीघा फसल नष्ट होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिए हैं. जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और 200 परिवारों को राशन, पीने का पानी व चिकित्सा सहायता वितरित की.
बता दें कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के बाद मुना में ताजेवाला, ओखला और हथिनीकुंड बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. वहीं गोकुल बैराज से 82 हजार क्यूसेक पानी आगरा की ओर डिस्चार्ज किया जा रहा है.
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