SCO Summit 2025: इस मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ खड़े नजर आए. तीनों नेताओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि एशिया की राजनीति में एक नई धुरी उभर रही है. दूसरी ओर, अमेरिका और ट्रंप का प्रभाव इस मंच से लगभग गायब दिखाई दिया.
मेदिनी ज्योतिष और पंचांग के अनुसार यह समय केवल राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि ग्रह-स्थिति का भी संकेत है, जो आने वाले महीनों में ग्लोबल जिओ पॉलिटिक्स को गहराई से प्रभावित करने जा रहा है.
पंचांग और नक्षत्र का समझें संकेत
31 अगस्त 2025 को अष्टमी तिथि और नक्षत्र अनुराधा-ज्येष्ठा का योग था. चंद्रमा वृश्चिक राशि में था. इस दिन सम्मेलन का वातावरण पहले मित्रवत और अनुराधा नक्षत्र के कारण संवादकारी माहौल बना और ज्येष्ठा नक्षत्र ने इसके प्रभाव को शक्ति-प्रधान बना दिया.
1 सितम्बर 2025, सोमवार को नवमी की तिथि ज्येष्ठा नक्षत्र शाम 7:55 बजे तक, उसके बाद मूल नक्षत्र लगा. इस दिन विष्कम्भ 4:31 PM तक, फिर प्रीति योग का संयोग बना.
चन्द्रमा वृश्चिक राशि में 8 बजे तक इसके बाद धनु राशि में. सम्मेलन के मुख्य दिन में पहले सख्त शर्तें और प्रोटोकॉल (ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव), फिर पुराने ढांचों का विघटन और नए करारों का निर्माण (मूल नक्षत्र का प्रभाव) हुआ.
1 सितम्बर 2025 को मंगल कन्या राशि में था. कन्या में मंगल का प्रभाव सूक्ष्मता, तकनीकी विवरण, समझौतों की क्लॉज और टैरिफ/लॉजिस्टिक्स पर गहरी पड़ताल को दर्शाता है. इसलिए इस समिट में आक्रामक भाषणों से अधिक, टेक्नो-क्रैटिक और डेटा-आधारित करारों पर जोर दिखा.
ग्रह-गोचर और अंतरराष्ट्रीय समीकरण
शनि का मीन राशि में वक्री होना समुद्री नीतियों और सीमा विवादों में देरी लाता है. उदाहरण से समझें-
शनिर्वक्रो यदा जले, संधि-विग्रह-कृच्छ्रकः (बृहत्संहिता). यानि भारत-चीन सीमा विवाद में समाधान बार-बार टलता रहेगा.
गुरु मिथुन राशि में
गुरु संवाद, व्यापार और तकनीकी सहयोग का कारक है. मिथुन में इसका गोचर डिजिटल इकोनॉमी, डेटा शेयरिंग और व्यापारिक करारों को सक्रिय बनाता है.
SCO समिट में डेवलपमेंट बैंक और डिजिटल साझेदारी पर चर्चा इसी का नतीजा है. राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में बैठकर बहुपक्षीय मंचों (SCO, BRICS) में भारत-चीन-रूस के सहयोग का संकेत देता है.
वहीं केतु सिंह नेतृत्व संघर्ष को जन्म देता है. यानी एक तरफ धुरी बन रही है, दूसरी ओर कौन प्रमुख शक्ति होगा? यह सवाल तनाव को जिंदा रखेगा. मंगल का कन्या में होना बताता है कि इस सम्मेलन में तकनीकी क्लॉज, लॉजिस्टिक्स और ट्रेड टैरिफ पर सबसे ज़्यादा ध्यान गया.
भारत-चीन संबंध किस दिशा में बढ़ रहे हैं?
- सीमा और सुरक्षा: वार्ता जारी रहेगी, पर ठोस समाधान देर से निकलेगा.
- व्यापार: इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ सकता है.
- जिओ पॉलिटिक्स: SCO और BRICS में साझेदारी, लेकिन इंडो-पैसिफिक और संयुक्त राष्ट्र में मतभेद.
- जनभावना: भारत में चीन को लेकर अविश्वास बना रहेगा.
भारत-अमेरिका संबंध : भविष्य की दिशा
- भारत और अमेरिका के रिश्तों में सहयोग और तनाव दोनों दिखेंगे.
- व्यापारिक विवाद: आयात-निर्यात शुल्क और डेटा-लोकलाइजेशन पर खींचतान.
- सुरक्षा सहयोग: रक्षा साझेदारी यथावत रहेगी.
- तकनीकी पहलू: अमेरिका चाहेगा कि भारत चीन से दूरी बनाए, पर भारत अपनी स्वतंत्र नीति पर डटा रहेगा.
ग्रहों की चाल ये साफ बता रही है कि भारत-चीन-रूस की धुरी में सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों साथ रहेंगे. भारत-अमेरिका संबंधों में सुरक्षा सहयोग मजबूत तो होगा, लेकिन व्यापारिक तनाव गहरा होगा.
SCO समिट में पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग का एक साथ दिखना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक नए शक्ति-संतुलन का संकेत भी है.
7–8 सितम्बर 2025 को चंद्र ग्रहण लग रहा है. भाद्रपद पूर्णिमा का चन्द्र ग्रहण एशिया में दिखाई देगा. बृहत्संहिता में बताया गया है कि यत्र दृश्यते ग्रहणं तत्रैव क्लेशदा ध्रुवम्. यानी इस ग्रहण के बाद मीडिया और जनभावनाएं दोनों गर्म होंगी.
भारत-चीन और भारत-अमेरिका समीकरणों पर बयानबाजी तेज होगी. 28 नवम्बर 2025 से जब शनि मार्गी होंगे तो वार्ताओं में ठोस प्रगति और तनाव में कमी देखने को मिल सकती है.
SCO समिट 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि एशिया की राजनीति में PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग की धुरी मजबूत हो रही है. अमेरिका और ट्रंप इस मंच से अलग-थलग दिखाई दिए. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय बताता है कि भारत को आने वाले महीनों में संतुलनकारी नीति अपनानी होगी.
28 नवम्बर 2025 को शनि मार्गी होने के बाद भारत-चीन संबंधों में ठोस प्रगति और भारत-अमेरिका तनाव में कमी की संभावना है. भारत के लिए यह समय किसी एक पक्ष पर झुकने का नहीं, बल्कि संतुलन और धैर्य की नीति अपनाने का है.
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