यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने तियानजिन में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के परिणामों को ध्यान में रखते हुए कहा कि इस सम्मेलन के मुख्य दस्तावेज, 20 पेज के तियानजिन घोषणा पत्र में रूस के यूक्रेन पर युद्ध का जिक्र न होना बहुत ही आश्चर्यजनक और नकारात्मक संकेत है.
यूक्रेन ने कहा कि यह यूरोप में हुई सबसे बड़ी आक्रामकता है, जो विश्व युद्ध 2 के बाद सबसे गंभीर मानी जाती है और इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज में इसका उल्लेख न होना काफी हैरान करने वाला है. जबकि घोषणा पत्र में कई अन्य युद्धों, आतंकवादी हमलों और विश्व के घटनाक्रम का जिक्र है, रूस-यूक्रेन युद्ध की चुप्पी साफ तौर पर एक बड़ी चूक है.
रूस की चाल कामयाब नहीं हो पाई
यूक्रेन का कहना है कि बिना रूस की आक्रामकता का न्यायसंगत अंत किए, हम वैश्विक विकास, अंतरराष्ट्रीय शांति-सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन और विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के बीच व्यापारिक संबंधों के स्थिर विकास की बात नहीं कर सकते. यूक्रेन ने इस बात पर जोर दिया है कि एससीओ समिट के बयान में रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख न होना, रूस के कूटनीतिक प्रयासों की असफलता का परिचायक है. रूस कोशिश कर रहा था कि विश्व को इस युद्ध को लेकर दो हिस्सों में बांट दे और यह धारणा बनाई जाए कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाहर के देशों में रूस की आक्रामकता को लेकर सकारात्मक सोच है, लेकिन इस बार रूस की यह चाल कामयाब नहीं हो पाई.
रूस क्यों रहा असफल?
यूक्रेन का मानना है कि रूस अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद SCO के सदस्य देशों की राय को एक ऐसी स्थिति में लाने में असफल रहा जो उसके पक्ष में हो.यूक्रेन ने पुनः सभी शांति शांतिप्रिय देशों से अपील की है कि वे रूस की आक्रामकता का आकलन करते समय अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करें. यूक्रेन ने चीन की महत्वपूर्ण भूराजनीतिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए बीजिंग से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभाए. यह शांति तभी संभव होगी जब सभी पक्ष संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का सम्मान करें.
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