मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील के प्रदर्शन पर महाराष्ट्र में घमासान जारी है. इस बीच मुंबई के आजाद मैदान में चल रहे आंदोलन के मामले में मंगलवार (2 सितंबर) को भी बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई.
इससे पहले मराठा आंदोलनकारियों ने कल रात आजाद मैदान में आंदोलन जारी रखने के लिए पुलिस अनुमति बढ़ाने का आवेदन किया था. आज सुबह मुंबई पुलिस ने यह आवेदन खारिज कर दिया.
सड़कें खाली कर चुके मराठा आंदोलनकारियों का कहना है कि वे आज की सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे.
हाई कोर्ट में सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की बेंच के सामने हुई. सरकार की तरफ से पक्ष AG डॉक्टर बीरेंद्र सराफ ने रखा. वहीं मराठा आंदोलनकारियों की ओर से एडवोकेट सतीश मानशिंदे पेश हुए.
मनोज जरांगे का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना
हाई कोर्ट में सुनवाई के बीच आरक्षण की मांग को लेकर अनशन कर रहे मनोज जरांगे ने कहा कि वह सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वह मुंबई नहीं छोड़ेंगे. मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में जरांगे ने शुक्रवार (29 अगस्त) को अनशन शुरू किया था. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है. मराठा समुदाय को राज्य की राजधानी में प्रवेश करने से कोई नहीं रोक सकता.
मनोज जरांगे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बॉम्बे हाई कोर्ट को गलत जानकारी दे रहे हैं और उन्हें इसकी ‘‘कीमत चुकानी’’ पड़ेगी. जरांगे ने दावा किया, ‘‘आपको पता ही नहीं चलेगा कि वे मुंबईकर हैं या मराठा। अगले सोमवार जो भी होगा, वह फडणवीस की गलती की वजह से होगा.’’
उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि सरकार उनकी आरक्षण की मांग स्वीकार करे और मराठों को कुनबी (अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल एक कृषि प्रधान जाति) के रूप में मान्यता देते हुए एक सरकारी आदेश जारी करे. इससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र बन सकेंगे.
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