पाकिस्तान की असल कमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नहीं, बल्कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हाथों में है और ये एक बार फिर साबित हो गया है. एससीओ समिट के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान शहबाज शरीफ के साथ आसिम मुनीर भी मौजूद थे.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन (31 अगस्त-1 सितंबर) के लिए चीन के दौरे पर हैं. इसके अलावा 3 सितंबर को चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित होने वाली विक्ट्री परेड में शामिल होने की संभावना है.
चीन के साथ मीटिंग में आसिम मुनीर मौजूद
ऐसे में मंगलवार (2 सितंबर, 2025) को शहबाज शरीफ ने शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस मीटिंग में शहबाज के साथ आसिम मुनीर और पाकिस्तानी उप-प्रधानमंत्री इशाक डार भी दिखाई दिए. खास बात ये है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मुनीर को ही लंच के लिए आमंत्रित किया था क्योंकि पाकिस्तान में हमेशा से सेना ही सरकार पर हावी रही है.

एक लंबे समय तक पाकिस्तान में मिलिट्री शासन रहा है और जो भी (तथाकथित) लोकतांत्रिक सरकार बनी हैं, वे सेना के रहम पर ही रहती हैं. ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथों मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान ने मुनीर का प्रमोशन किया और फील्ड मार्शल की रैंक से नवाजा. साथ ही देश का दूसरे सबसे बड़ा वीरता मेडल भी प्रदान किया. इसके बाद मखौल उड़ाया गया था कि मुनीर ने खुद को फील्ड मार्शल और वीरता मेडल दिया है.
चीन और पाकिस्तान की साझेदारी मौजूद
मंगलवार को शी जिनपिंग के साथ हुई मीटिंग में शहबाज के एक तरफ इशाक डार थे और दूसरी तरफ आसिम मुनीर. शी जिनपिंग के साथ फोटो सेशन के दौरान भी मुनीर को देखा जा सकता है. मीटिंग के बाद पाकिस्तान ने बयान जारी कर कहा कि शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन और पाकिस्तान की ऑल-वेदर सामरिक-साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, जिससे शांति, समृद्धि और कनेक्टिविटी बढ़ रही है.
चीन और पाकिस्तान के संबंध किसी से छिपे नहीं रहे हैं. चीन के हथियारों से लेकर बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) में पाकिस्तान एक अहम पार्टनर है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी चीन ने पाकिस्तान की सैटेलाइट इमेजरी से लेकर कम्युनिकेशन तक में मदद की थी.
चीन ने भारत को बताया पार्टनर
एससीओ समिट में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान भारत और चीन के संबंधों में आपसी विश्वास और संवेदनशीलता को प्रमुख आधार बताया था. राष्ट्रपति जिनपिंग ने मुलाकात के दौरान भारत और चीन को दुश्मन के बजाए पार्टनर बताया था.
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