दुनिया के बड़े-बड़े नेता किसी दूसरे देश में जाने के लिए हवाई जहाज का सहारा लेते हैं, लेकिन नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन प्लेन नहीं बल्कि ट्रेन के जरिए चीन पहुंचे. किम जोंग सोमवार की शाम को उत्तर कोरिया की राजधानी से अपनी बख्तरबंद ट्रेन के जरिए 20 घंटे का सफर करके चीन पहुंचे हैं. किम जोंग उन की यह खास हरे रंग की ट्रेन किसी किले से कम नहीं है. इसमें वो सारी सुविधाएं मौजूद हैं, जो कि किसी राजा के किले में होती हैं. इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि हमले की स्थिति में नेता को ट्रेन में बचाया जा सके. इसे सुरक्षा की दृष्टि से बनाया गया है.
इस खास ट्रेन का इस्तेमाल केवल किम जोंग-उन ही नहीं, बल्कि उनके पिता किम जोंग-इल और दादा किम इल-सुंग भी करते थे. चलिए जानें कि किम जोंग उन की यह ट्रेन कितने देशों का सफर करती है और इसमें एक किलोमीटर में आखिर कितना खर्चा आता है.
किन देशों तक जाती है किम जोंग-उन की ट्रेन?
किम जोंग-उन की यह स्पेशल ट्रेन मुख्य रूप से उत्तर कोरिया से चीन और रूस तक जाती है. 2019 में किम ने इसी ट्रेन से व्लादिवोस्तोक (रूस) और बीजिंग (चीन) की यात्राएं की थीं. सुरक्षा कारणों से यह ट्रेन केवल उन्हीं देशों तक जाती है जहां सीधे रेल कनेक्शन मौजूद है और जहां किम को राजनीतिक या रणनीतिक कारणों से जाना पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेन मंगोलिया तक भी जा सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
ट्रेन की सुरक्षा और लक्जरी
यह ट्रेन पूरी तरह बुलेटप्रूफ है और इसके हर डिब्बे को स्टील की मोटी परत से मजबूत किया गया है. ट्रेन के अंदर आधुनिक संचार तकनीक, सैटेलाइट फोन, बड़े मीटिंग हॉल, डाइनिंग कार और वाइन-बार तक मौजूद हैं. किम जोंग-उन के लिए इसमें प्राइवेट सुइट्स बनाए गए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, इस ट्रेन में यात्रा के दौरान ताजे समुद्री भोजन और शराब तक परोसी जाती है.
किम की सुरक्षा के लिए सिर्फ यह ट्रेन ही नहीं, बल्कि इसके साथ दो और ट्रेनों का इस्तेमाल होता है. पहली ट्रेन सुरक्षा कर्मियों और जांच दल की होती है, जबकि तीसरी ट्रेन सप्लाई और अन्य सामान ले जाती है. यानी यह सफर किसी एक ट्रेन का नहीं, बल्कि एक पूरे काफिले का होता है.
कितना महंगा है एक किलोमीटर का सफर
सामान्य ट्रेनें जहां तेज रफ्तार से चलती हैं, वहीं किम जोंग-उन की ट्रेन की औसत स्पीड सिर्फ 60 किमी/घंटा रखी जाती है. इसकी वजह है सुरक्षा, ताकि रास्ते की पूरी जांच-पड़ताल हो सके और किसी खतरे को टाला जा सके. धीमी रफ्तार और भारी सुरक्षा व्यवस्था खर्च को कई गुना बढ़ा देती है.
दक्षिण कोरिया और जापानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, इस ट्रेन पर आने वाला खर्च एक सामान्य ट्रेन से 4-5 गुना ज्यादा होता है. अनुमान है कि प्रति किलोमीटर करीब 25–30 लाख वॉन (लगभग 15–18 लाख भारतीय रुपये) खर्च होता है. इसमें ईंधन, सुरक्षाकर्मियों का खर्च, खाना-पीना, तकनीकी उपकरण और रखरखाव सब शामिल हैं. हालांकि इसकी सही लागत को लेकर उत्तर कोरिया कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं करता है.
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