मुगल बादशाह जहांगीर (1569–1627), अकबर के सबसे बड़े बेटे थे और 1605 से 1627 तक शासन किया. हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि 1611 से 1627 तक जहांगीर का शासन पूर्णतः स्वतंत्र नहीं रहा, क्योंकि उनकी पत्नी नूरजहां का उन पर गहरा प्रभाव था.
जहांगीर और नूरजहां की शादी 1611 में हुई थी. नूरजहां उनकी 20वीं और आखिरी पत्नी थीं. जहांगीर की नशे की आदतों और अदालती कार्यवाहियों से उनकी अनुपस्थिति ने नूरजहां को सत्ता पर पकड़ बनाने का अवसर दिया.
शराब और अफीम की लत
जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुज़ुके-जहांगीरी में लिखा है कि एक समय वे प्रतिदिन 20 प्याले शराब पीते थे. 14 प्याले दिन में और 6 प्याले रात में. शराब में इस्तेमाल होने वाली बर्फ कश्मीर से मंगाई जाती थी. ऐसा होने के बाद उन्होंने सेवन कम करके दिन में 6 प्याले करना शुरू किया, लेकिन अफीम की लत पहले की तरह ही बरकरार रही. इसका नतीजा ये हुआ कि साल 1622 तक अफीम के कारण उन्हें अस्थमा हो गया था और आखिरकार 28 अक्टूबर 1627 को 58 वर्ष की उम्र में अस्थमा के कारण ही उनकी मौत हो गई. दिलचस्प बात यह है कि जहांगीर के दो भाइयों की मौत भी शराब की लत के कारण हुई थी.
ग़ुसलख़ाने में दरबार
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहांगीर ने ग़ुसलखाने (बाथरूम) में दरबार लगाने की परंपरा को अपनाया. यह परंपरा शेरशाह सूरी ने शुरू की थी, क्योंकि उनके घुंघराले बालों को सूखने में समय लगता था, इसलिए वे बाथरूम में ही बैठकों का आयोजन करते थे. जहांगीर ने भी इस परंपरा को जारी रखा. उनकी दोपहर की दरबार सार्वजनिक होती थी, जबकि शाम की दरबार ग़ुसलख़ाने में लगती थी. वहां वे अपने खास लोगों के साथ शराब पीते और वार्तालाप करते थे. इसके बाद वे सो जाते और आधी रात को भोजन करते थे.
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