चीन ने बुधवार (3 अगस्त 2025) को अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए खतरनाक फाइटर जेट, मिसाइल और नए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हार्डवेयर सहित अपने कुछ आधुनिक हथियारों को पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और ईरान, मलेशिया, म्यांमा, मंगोलिया, इंडोनेशिया, जिम्बाब्वे और मध्य एशियाई देशों के नेताओं सहित 26 विदेशी नेताओं ने इस विक्ट्री परेड में भाग लिया.
भारत के पड़ोसी देशों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू इस परेड में शामिल हुए. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने विदेशी मेहमानों का स्वागत किया. द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी आक्रमण के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस परेड में सैकड़ों सैनिक शामिल हुए.
विक्ट्री परेड में हथियारों का जखीरा
चीन ने आर्मी परेड में एक-से-बढ़कर एक हथियारों की प्रदर्शन किया. इस तरह से चीन ने पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास दिलाया. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 5वीं पीढ़ी के फाइटर J-35A से लेकर DG-5C इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हथियारों को परेड में शामिल किया.
J-20S और J-35 फाइटर जेट: चीन ने अपने सबसे अपग्रेडेड J-20S और J-35A जैसे खतरनाक फाइटर जेट्स को दुनिया के सामने दिखाया. ट्विन-सीट J-20S ड्रोन को कंट्रोल करने में सक्षम है, जबकि J-35 जेट को एयरक्राफ्ट कैरियर और जमीन, दोनों से ऑपरेट किया जा सकता है.
DF-5C इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल: DF-5C चीन की नई लंबी दूरी की मिसाइल है. इसकी रेंज 13,000 किमी से ज्यादा है. यह एक साथ 10 अलग-अलग वॉरहेड ले जा सकती है और किसी भी महाद्वीप तक पहुंच सकती है. इसी मिसाइल की वजह से अमेरिका टेंशन में आ गया है.
आर्मी और नेवी ड्रोन सिस्टम: चीन की सेना ने पहली बार अपने अनमैन्ड सिस्टम्स को परेड में शामिल किया है. चीनी आर्मी के पास अब ऐसे ड्रोन हैं, जो रिकॉन्नसेंस, स्ट्राइक और माइन्स हटाने का काम कर सकते हैं. नेवी के ड्रोन में अंडरवॉटर व्हीकल्स, सरफेस ड्रोन और माइन-लेइंग सिस्टम शामिल हैं. ये भविष्य में समुद्री युद्ध के ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित होंगे.
KJ-500A और KJ-600 एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट: चीन का KJ-500A, Y-9 ट्रांसपोर्ट विमान पर आधारित है. इसके रडार में AESA तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसकी मदद से यह एक बार में 100 टारगेट्स को एक साथ ट्रैक कर सकता है. इसके नए वर्जन में एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग की सुविधा भी दी गई है, यानी यह एक बार में लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम है.
इसके अलावा दर्जनों ऐसे खतरनाक हथियार परेड में शामिल किए गए थे, जिससे चीन अपनी शक्ति प्रदर्शन को दिखाने में कोई भी कमी नहीं दिखाना चाहता था.
बेटी किम जू ए के साथ चीन पहुंचे किम
किम अपनी बेटी किम जू ए के साथ मंगलवार रात को ट्रेन से बीजिंग पहुंचे. यह 2019 के बाद से उनकी दूसरी चीन यात्रा है और किम के पुतिन से करीबी संबंध स्थापित करने के प्रयासों के बीच उत्तर कोरिया और चीन के बीच दरार की अफवाहों के बाद यह पहली यात्रा है. बीजिंग में शी, पुतिन और किम की एक साथ उपस्थिति, विशेष रूप से एक सैन्य परेड में चीन की तरफ से अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक कड़ा संदेश भेजने के प्रयास के रूप में देखी गई है. बीजिंग में उनकी मुलाकात तियानजिन में 10 सदस्यीय शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन के बाद हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी और पुतिन के साथ बैठकें चर्चा में रहीं. यह बैठक ट्रंप की तरफ से रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने की पृष्ठभूमि में हुई थी.
कहां हुआ चीन की विक्ट्री परेड का आयोजन?
बीजिंग के ऐतिहासिक तियानमेन चौक पर चीन के विक्ट्री परेड का आयोजन हुआ. अपने हथियारों को लेकर अक्सर गोपनीयता बरतने वाली चीनी सेना ने पहली बार अपने अत्याधुनिक हथियारों का भी सार्वजनिक प्रदर्शन किया, जिनके बारे में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का दावा है कि वे अमेरिकी सेना के हथियारों से मेल खाते हैं. चीन और विश्व भर से बड़ी संख्या में पत्रकारों को भारी सुरक्षा के बीच आयोजित होने वाली इस परेड में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है.
जापान ने विश्व नेताओं से किया था आग्रह
द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीन के प्रतिरोध युद्ध की स्मृति में आयोजित परेड में विदेशी नेताओं की उपस्थिति, जापान और चीन के बीच कूटनीतिक विवाद का विषय बन गई है, क्योंकि जापान ने वैश्विक नेताओं से इसमें भाग न लेने का आग्रह किया था. चीन ने विश्व के दिग्गज नेताओं से इस कार्यक्रम में शामिल न होने के अनुरोध को लेकर जापान के समक्ष कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है. चीन अपने वैश्विक प्रभाव और सैन्य शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है, जिसे शी की छवि को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.
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