श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में शिलापट में लगे अशोक स्तंभ को लेकर विवाद के मामले में पुलिस ने 25 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. अधिकारियों ने रविवार (07 सितंबर) को बताया कि हजरतबल दरगाह में अशोक चिह्न के साथ तोड़फोड़ के सिलसिले में दो दर्जन से ज्यादा लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद ये कार्रवाई हुई है.
अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार की नमाज के बाद हुई तोड़फोड़ की घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने 25 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, “अभी तक किसी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है.”
अशोक चिह्न वाली पट्टिका के तोड़फोड़ के बाद छिड़ा विवाद
कश्मीर में शुक्रवार (05 सितंबर) को हजरतबल दरगाह में अशोक चिह्न वाली एक पट्टिका के साथ तोड़फोड़ के बाद बड़ा विवाद छिड़ गया. राजनीतिक दलों ने वक्फ बोर्ड की प्रमुख दरख़्शां अंद्राबी पर मस्जिद में राष्ट्रीय चिह्न का इस्तेमाल करके धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और उन्हें तुरंत हटाने की मांग की.
वक्फ बोर्ड को गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए- उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जोर देते हुए कहा, ”मैंने कभी किसी धार्मिक स्थल पर इस तरह से प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल होते नहीं देखा. मस्जिदें, दरगाह, मंदिर और गुरुद्वारे सरकारी संस्थाएं नहीं हैं. वक्फ बोर्ड को इस गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए. राष्ट्रीय चिह्न सरकारी कार्यों के लिए है, धार्मिक संस्थानों के लिए नहीं.”
जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और सीपीआई(एम) जैसी पार्टियों ने मस्जिद में अशोक चिह्न के इस्तेमाल को भड़काऊ और ईशनिंदा वाला बताया, वहीं बीजेपी ने पट्टिका को क्षतिग्रस्त करने की कड़ी निंदा करते हुए दावा किया कि यह घटना घाटी में आतंकवाद और अलगाववाद को फिर से जगाने की कोशिश है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने घटना की निंदा की
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हिंसा की निंदा करते हुए न केवल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष से माफी, बल्कि उन्हें पद से हटाने की भी मांग की है. एनसी के विधायक और मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, “हम विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पिछले पांच वर्षों के दौरान वक्फ के वित्तीय और संपत्तियों में हुई हेराफेरी की जांच के लिए एक समिति गठित करने की मांग करेंगे.”
अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
यह पट्टिका गुरुवार को हज़रतबल दरगाह के अंदर रखी गई, जहां पैगंबर मुहम्मद का एक अवशेष रखा हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं में आक्रोश फैल गया. उनका कहना था कि मस्जिद के अंदर कोई भी आकृति या प्रतीक रखना एकेश्वरवाद के इस्लामी सिद्धांत के खिलाफ है. शुक्रवार की नमाज के बाद अज्ञात लोगों ने पट्टिका को तोड़ दिया और हटा दिया, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया.
यह विवाद तब और बढ़ गया जब बीजेपी की ओर से नियुक्त अंद्राबी ने प्रतीक चिन्ह को तोड़ने के लिए आरोपियों पर कठोर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मुकदमा चलाने सहित कानूनी कार्रवाई की मांग की.
वक्फ बोर्ड ने लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया- CM
सीएम अब्दुल्ला ने अंद्राबी की प्रतिक्रिया की निंदा करते हुए कहा, ”बोर्ड ने लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया और अब धमकियां दे रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा, “सबसे पहले, कम से कम उन्हें इसके लिए माफ़ी मांगनी चाहिए थी. उन्हें अपनी गलती माननी चाहिए. ऐसा नहीं होना चाहिए था.”
PDP ने की ईशनिंदा का मुकदमा दर्ज करने की मांग
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने डॉ. दरख्शां अंद्राबी और वक्फ अधिकारियों के खिलाफ धारा 295-A के तहत ईशनिंदा का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. वही सीपीआई के महासचिव मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने वक्फ अध्यक्ष के हटाने की मांग का समर्थन करते हुए दरगाह के अंदर अशोक चिह्न लगाने की लोगों के धार्मिक संवेदना को भड़काने की एक साजिश करार दिया.
बीजेपी की सिथानय ईकाई दरख्शां अंद्राबी के समर्थन में है लेकिन धार्मिक भावनाओं के चलते बीजेपी के कई नेता विरोध में भी खड़े हो गए हैं. अब लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले के और ज्यादा तुल पकड़ने के पूरे आसार हैं.
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