पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. अब उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव पर मैच फिक्सिंग (Kapil Dev Match Fixing) के आरोप लगाए हैं. उन्होंने यह तक दावा कर डाला है कि जानबूझकर उनके केस पर सुनवाई नहीं की गई थी. कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 1983 का वर्ल्ड कप जीता था. उसके करीब 11 साल बाद पूर्व क्रिकेटर मनोज प्रभाकर ने कपिल देव पर आरोप लगाए कि कपिल ने श्रीलंका में खेले गए एक टूर्नामेंट में मैच को फिक्स करने के लिए पैसे लिए थे.
इनसाइड स्पोर्ट के मुताबिक योगराज सिंह ने कहा, “सभी पत्रकारों से पूछिए कि सुप्रीम कोर्ट में उस मैच की फाइल कहां बंद पड़ी है. कौन-कौन मैच फिक्सिंग मामले में सम्मिलित था? पहले कपिल देव का नाम आया, फिर मोहम्मद अजहरुद्दीन और कई अन्य खिलाड़ियों का. उस केस की फाइल को क्यों बंद किया गया और फाइल दोबारा क्यों नहीं खुली. ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि इससे कई दिग्गजों के सिर कटेंगे.”
कपिल देव पर आरोप लगाते हुए मनोज प्रभाकर ने 1997 में खुलासा किया था कि कपिल देव ने उन्हें धीमा खेलने के लिए पैसा ऑफर किया था. इस मामले की जांच CBI ने की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कपिल देव के खिलाफ मैच फिक्सिंग के पुख्ता सबूत नहीं मिले. वहीं BCCI ने इस मामले की जांच के लिए चंद्रचूड़ समिति का गठन किया, जिसने साल 2000 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि ऐसा कोई ठोस कारण नहीं था कि क्यों मनोज प्रभाकर को मैच फिक्सिंग के आरोपों को रिपोर्ट करने के लिए कई साल तक का इंतजार करना पड़ा.
योगराज सिंह इससे पहले भी कपिल देव पर निशाना साध चुके हैं. पिछले साल ही उन्होंने भारतीय स्क्वाड से बाहर होने पर कपिल देव को जान से मारने की धमकी देने का दावा किया था.
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