राउज एवेन्यू कोर्ट में वकीलों ने उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की उस अधिसूचना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें पुलिसकर्मियों को थानों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही देने की अनुमति दी गई है. वकीलों का कहना है कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है और अदालतों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है.
वकीलों का आरोप है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुलिस गवाहों को अदालत से जोड़ने का निर्णय असल में न्याय को कमजोर करने की कोशिश है. उनके अनुसार, यदि पुलिसकर्मी कोर्ट में हाजिर नहीं होंगे तो गवाह की विश्वसनीयता की जांच गंभीर रूप से प्रभावित होगी. प्रदर्शन के दौरान एक वकील ने कहा, “गवाही कोर्ट में आमने-सामने होनी चाहिए. गवाह का आचरण, उसकी हिचकिचाहट और उसके जवाब देने का तरीका सब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है. वीडियो पर यह सब पूरी तरह संभव नहीं है.”
VIDEO | Delhi: Lawyers at Rouse Avenue court continue to protest against LG VK Saxena’s notification allowing police personnel to give evidence in courts from police stations via video conferencing.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/Osw09ATV9o
— Press Trust of India (@PTI_News) September 8, 2025
वी.के. सक्सेना के खिलाफ वकीलों ने किया प्रदर्शन
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कि अदालत में पुलिस अधिकारियों की शारीरिक उपस्थिति से ही निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सकती है. यदि गवाह थाने से ही बोलेंगे तो क्या यह गारंटी है कि उन पर किसी का दबाव नहीं होगा? कोर्ट का माहौल अलग होता है और वहीं सच्चाई सामने आती है.
वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही की व्यवस्था पुलिस को अनुचित लाभ पहुंचा सकती है. इससे गवाहों पर सीधा या अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ने का खतरा रहेगा. उनका कहना है कि यह अधिसूचना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चोट है और संविधान प्रदत्त निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती है.
परिसर में जुटे होकर वकीलों ने की नारेबाजी
राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में जुटे वकीलों ने नारेबाजी करते हुए मांग की कि इस अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश को रद्द नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कि हम न्यायिक प्रक्रिया के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं करेंगे. गवाह अदालत में ही पेश हों, यही परंपरा और यही कानून का तकाजा है.
प्रशासनिक सुविधा की आड़ में हिलाई जा रही न्याय की नींव
गौरतलब है कि उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से हाल ही में जारी अधिसूचना में कहा गया था कि पुलिसकर्मी थानों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालतों में गवाही दे सकते हैं. सरकार का तर्क है कि इससे पुलिसकर्मियों का समय बचेगा और लंबित मामलों की सुनवाई तेजी से हो सकेगी. लेकिन वकीलों का कहना है कि प्रशासनिक सुविधा की आड़ में न्याय की नींव को हिलाया जा रहा है.
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