भारत-रूस की पुरानी हेलीकॉप्टर डील फिर से शुरू होने की उम्मीद है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2025 में व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान Ka-226T लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर पर फिर से बातचीत शुरू हो सकती है. रूस ने VK-650V टर्बोशाफ्ट इंजन खुद से तैयार कर लिया है. यह इंजन पहले वाले फ्रेंच Safran Arrius 2G1 इंजन की जगह लेगा, जो पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस को नहीं मिल पा रहा था.
नया VK-650V इंजन
ओडीके-क्लिमोव द्वारा विकसित वीके-650वी एक रूसी टर्बोशाफ्ट इंजन है, जिसे KA-226 टी और एनसैट जैसे हल्के हेलीकॉप्टरों के लिए डिजाइन किया गया है. यह 650 एचपी (750 एचपी तक इमरजेंसी पावर के साथ) आता है और इसमें FADEC डिजिटल कंट्रोल के साथ एक मॉड्यूलर डिजाइन भी है. खास बात ये है कि यह इंजन हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशंस के लिए भी ऑप्टिमाइज्ड है. लद्दाख और अरुणाचल जैसे पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से काम कर सकेगा, जहां हवा पतली होती है और मौसम बेहद कठोर रहता है.
द यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एनसैट मूल रूप से प्रैट एंड व्हिटनी कनाडा PW207K इंजन द्वारा संचालित था. इन इंजनों के निर्यात पर रोक के कारण रूस को अपना वैकल्पिक ऊर्जा संयंत्र विकसित करना पड़ा.
क्या है इंडो-रशियन हेलीकॉप्टर्स लिमिटेड योजना
2015 में भारत और रूस ने कम से कम 200 Ka-226T हल्के उपयोगिता वाले हेलीकॉप्टरों के संयुक्त निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. योजना के तहत 60 हेलीकॉप्टर इंपोर्ट किए जाएंगे और 140 हेलीकॉप्टर ज्वाइंट उद्यम इंडो-रशियन हेलीकॉप्टर्स लिमिटेड (IRHL) द्वारा मिलकर स्थानीय स्तर पर बनाए जाएंगे.
क्यों अटकी थी ये परियोजना
बता दें कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास 50.5 प्रतिशत, रशियन हेलीकॉप्टर्स के पास 42.5 प्रतिशत और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के पास 7 प्रतिशत स्टॉक है. यह परियोजना 2022 की शुरुआत में कई कारणों से रुकी हुई थी. भारत का रक्षा खरीद बोर्ड, स्वदेशी विकल्प के रूप में अपने लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) के विकास को पूरा करने के लिए HAL को और समय देना चाहता था.
इसके अलावा भारत को 70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री की आवश्यकता थी, लेकिन रूस केवल 62 प्रतिशत ही दे सका, क्योंकि इंजन विदेशी था. अब रूस द्वारा विकसित VK-650V से संचालित Ka-226T के साथ रूस 70 प्रतिशत से अधिक स्थानीयकरण स्तर की पेशकश करने में सक्षम हो सकता है.
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