बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा से पहले रैलियां, यात्राएं और जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन दोनों प्रमुख गठबंधन एनडीए और महागठबंधन में सीटों को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही है. गठबंधन में शामिल पार्टियां अधिक से अधिक सीटें अपने खेमे में लाना चाहती है, इसके लिए दिल्ली से लेकर पटना तक लगातार बैठकें हो रही हैं.
इस बीच नीतीश कुमार ने पिछले दिनों राजपुर सीट पर उम्मीदवार की घोषणा कर बीजेपी को असहज कर दिया. 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडी) में शामिल जेडीयू ने कुल 243 विधानसभा सीटों में 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.
इस चुनाव में भी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) बड़े भाई की भूमिका में थी. तब जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा (सेक्युलर) को सात सीटें मिली थी. बीजेपी के साथ गठबंधन में रही मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

2020 के चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) अकेले चुनाव लड़ी थी. तब पार्टी एकजुट थी. अब दो गुटों में बंट चुकी पार्टी का मजबूत धड़ा चिराग पासवान की एलजेपी (आर) एनडीए के साथ है. एलजेपी (आर) अधिक से अधिक सीटों की मांग कर रही है.
एलजेपी ने जेडीयू के खिलाफ हर सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. नतीजा रहा कि जदयू तीसरे नंबर की पार्टी बन गई. 43 सीटों पर ही सिमट गई. वहीं बीजेपी को 74 सीटें मिली.
हालांकि इस बार भी 2020 की तरह ही बीजेपी और जेडीयू का फॉर्मूला नहीं बदलेगा और नीतीश कुमार ही बड़े भाई की भूमिका में होंगे. हालांकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हम और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) जैसे सहयोगी दल अपने लिए ज्यादा सीटें सुनिश्चित करने के लिए दांव-पेंच में लगे हुए हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल्द ही एनडीए की बैठक होगी और इस बैठक में सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जा सकता है. चिराग पासवान ने मंगलवार (9 सितंबर) को कहा कि जल्द ही बिहार में सीटों का बंटवारा हो जाएगा.
चिराग पासवान की पार्टी की नसीहत!
चिराग पासवान की पार्टी 40 सीटों तक की मांग कर रही है. जमुई से सांसद अरुण भारती ने सीटों की मांग करते हुए 2020 के चुनाव का जिक्र किया है.
उन्होंने 7 सितंबर को कहा, कार्यकर्ता ही हमारी पार्टी की असली रीढ़ हैं. पार्टी के लिए जी-जान से मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की यह स्वाभाविक उम्मीद होती है कि एक दिन उन्हें भी पार्टी की तरफ से जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करने का अवसर मिले. 2020 में जब गठबंधन धर्म के कारण हम अपने कार्यकर्ताओं की इस भावना और उम्मीदों को पूरा नहीं कर सके, तब हमने अकेले चुनाव लड़ने का साहसिक निर्णय लिया. यह केवल चुनावी राजनीति नहीं थी, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान था.”
अरुण भारती ने एक्स पर लिखा, ”भले ही उस चुनाव में हम केवल एक सीट जीत पाए, लेकिन सच्चाई यह है कि 137 सीटों पर चुनाव लड़कर हमें 6% वोट मिला था. अगर हम पूरे 243 सीटों पर चुनाव लड़ते, तो हमारा वोट प्रतिशत 10% से भी अधिक होता. यह हमारे कार्यकर्ताओं की ताक़त और जनता के विश्वास का जीता-जागता सबूत था.”
क्या बोले जीतन राम मांझी?
जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए में सीट बंटवारे पर केंद्रीय नेतृत्व का फैसला ही अंतिम होगा. सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है.

सीटों को लेकर उपेंद्र कुशवाहा से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हम सभी एनडीए में रहते हुए 243 सीटों पर मजबूती से लड़ेंगे. हमारी पार्टी कितनी सीटों पर लड़ेगी, ये उचित प्लेटफॉर्म पर बता दिया जाएगा. सार्वजनिक तौर पर बात करने से फायदा तो है नहीं, नुकसान ही होगा.
सूत्रों के मुताबिक, तमाम दावों और मांगों के बीच जेडीयू 102, बीजेपी 101, एलजेपी (आर) 20, हम 10 और आरएलएम 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.

महागठबंधन में क्या है चर्चा?
वहीं महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) में आरजेडी, लेफ्ट और मुकेश सहनी की वीआईपी के साथ शामिल कांग्रेस की सीट बंटवारे को लेकर मंगलवार (9 सितंबर) को दिल्ली में बैठक हुई. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, बिहार के लिए बनी कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन अजय माकन, बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अलावरू,बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कन्हैया कुमार, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और रंजीत रंजन शामिल थे.
बैठक के बाद कृष्णा अल्लावरू ने कहा कि हाल ही में बिहार में हुई राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा को लेकर इस बैठक में रिव्यू किया गया. बाक़ी दलों के साथ सीट शेयरिंग और बाक़ी चीजों पर चर्चा जारी है.
कब तक फाइनल होगा फॉर्मूला?
राजेश राम ने कहा कि सीटों को लेकर सभी चर्चाएं INDIA गठबंधन की बैठक में हो चुकी हैं. सीटों का ब्यौरा बाद में साझा किया जाएगा.
महागठबंधन में चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस की पार्टी एलजेपी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम को भी जगह देने की चर्चा है. पशुपति पारस ने सोमवार (8 सितंबर) को कहा कि हम महागठबंधन के साथ हैं, आगे जो भी महागठबंधन के कार्यक्रम होंगे, वहां मैं भी उपस्थित रहूंगा. 15 सितंबर से 20 सितंबर तक महागठबंधन में सीट का बंटवारा हो जाएगा.
कांग्रेस की घटेगी सीटें?
कांग्रेस 2020 के चुनाव में 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. लेकिन इस बार आरजेडी 50 से 55 सीटें देना चाहती है. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस बार 60 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. आरजेडी 140 सीटों पर इसबार चुनाव लड़ सकती है.
सूत्रों ने बताया कि आरजेडी 122 से 124, कांग्रेस 58 से 62, लेफ्ट 31 से 33, वीआईपी 20 से 22, एलजेपी 58 से 62 और जेएमएम 2 से तीन सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.

दिलचस्प है कि मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने 50 सीटें मांगी हैं. सहनी हाल ही में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान लगातार साथ रहे. इस दौरान विपक्षी खेमे ने एकजुटता दिखाई.
2020 के चुनाव में आरजेडी 144 और कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. तब महागठबंधन में कांग्रेस-आरजेडी के साथ भाकपा (माले), भाकपा और माकपा शामिल थी. भाकपा (माले) 19, भाकपा 6 और माकपा 4 सीटों पर चुनाव लड़ी थी.
कुल 243 सीटों में आरजेडी 2020 में 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस को 70 सीटों में से केवल 19 सीटें ही मिलीं. भाकपा (माले) का स्ट्राइक रेट सहयोगियों में सबसे अच्छा रहा था. उसे 19 में 12 सीटों पर जीत मिली थी.
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