सितंबर 2025 की शुरुआत में दो शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं का योग बना. पहली 7-8 सितंबर को चंद्र ग्रहण और 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण लगेगा.
शास्त्रों में जब लगातार दो ग्रहण पड़ते हैं, उसे ग्रहणपाक दोष कहा गया है. भविष्य पुराण स्पष्ट लिखता है कि ऐसा होने पर राजा संकट में आता है और जनता विद्रोही बनती है.
चंद्र ग्रहण जो कि 7-8 सितंबर की रात लगा था. चंद्र ग्रहण उस समय लगा जब चंद्रमा कुंभ और मीन की संधि हो रही थी और पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र था. राहु की छाया ने उसे पूरी तरह ढक लिया, कुंभ राशि का सीधा संबंध जनता, संगठनों और सामूहिक शक्ति से है. नेपाल में इसका असर देखने को मिला.
नेपाल का Gen Z Protest
7-8 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण हुआ. इस समय चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में संधि पर था और राहु-केतु की छाया में ग्रसित था. शनि देव मीन राशि में स्थित थे, जिससे जनता पर दबाव बढ़ा, क्योंकि शनि जनता और लोकतंत्र के भी कारक माने गए हैं.
गुरु मिथुन राशि में पुनर्वसु नक्षत्र पर था, जो शोर, आंदोलन और अस्थिरता का कारक है. बृहज्जातक कहता है कि चंद्रग्रहे प्रजाविक्रमा जब चंद्र ग्रहण होता है तो जनता विद्रोही बनती है. यही नेपाल में हुआ, जहां Gen Z युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सत्ता को चुनौती दी.
सूर्य ग्रहण और अब सत्ता की परीक्षा
21 सितंबर 2025 को सूर्य ग्रहण कन्या राशि में लगने जा रहा है. बुध का संबंध युवाओं से भी है. क्योंकि बुध को ग्रहों का राजकुमार भी कहा गया है. जो किशोर हैं युवास्था की तरफ अग्रसर है वे बुध ग्रह से प्रभावित होते हैं.
शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण सत्ता और नीतियों पर सीधा आघात करता है. भविष्य पुराण का श्लोक कहता है सूर्यग्रहे नृपभ्रंशः यानी सूर्य ग्रहण राजा या शासक को संकट में डालता है. यही कारण है कि नेपाल के बाद फ्रांस में भी भारी जनआंदोलन हुआ.
फ्रांस में Block Everything
9-10 सितंबर 2025 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. 80,000 पुलिस तैनात की गई. 250 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं.
बसों और ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया गया. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने डिफेंस मिनिस्टर Sebastien Lecornu को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया, पर जनता ने इसे सत्ता की चाल माना.
यह वही स्थिति है जिसे ग्रहलाघव वर्णित करता है कि जब एक ही महीने में दो ग्रहण हों, तो राजकीय अस्थिरता और हिंसक आंदोलनों की संभावना बढ़ती है.
भारत, चीन और अमेरिका पर असर
भारत- सितंबर-अक्टूबर 2025 में विश्वविद्यालय और छात्र संगठनों के असंतोष की शुरुआत. नवंबर-दिसंबर 2025 में रोजगार और शिक्षा नीति को लेकर बड़े आंदोलन.
जनवरी 2026 तक सरकार को नीति सुधारों की घोषणा करनी पड़ सकती है. भारत में यह असर शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर दिखाई देगा. मंगल का कन्या में होना विरोध को संगठित और रणनीतिक बनाएगा.
बुध का कन्या में प्रवेश (15 सितंबर) सरकार से दस्तावेजी और पारदर्शी जवाब मांगने का दबाव बढ़ाएगा. शनि मीन में वक्री होने के कारण संस्थाओं पर धीमा पर स्थायी तनाव बना रहेगा. नतीजा यह होगा कि नवंबर से जनवरी तक विश्वविद्यालयों और छात्र संगठनों से आंदोलनों की आवाज और तेज हो सकती है.
- चीन- बेरोजगारी और सेंसरशिप के कारण पहले से असंतुष्ट युवाओं का दबाव और बढ़ेगा. 2026 की शुरुआत में (विशेषकर फरवरी-मार्च) शनि और राहु का प्रभाव वहां साइलेंट प्रोटेस्ट को जन्म दे सकता है.
- अमेरिका- नेपाल और भारत जैसे लोकतांत्रिक आंदोलनों को समर्थन देगा. चीन और यूरोप की अस्थिरता का फायदा उठाकर अपनी पकड़ मजबूत करेगा. 2026 के मध्य तक अमेरिका इन संकटों को जियोपॉलिटिकल अवसर में बदलेगा.
पाकिस्तान में क्या होगा?
अक्टूबर 2025 में मंगल और शनि की दृष्टि टकराव बढ़ाएगी. भारत और पाकिस्तान में सड़क पर आंदोलन तेज होंगे. वहीं पाकिस्तान के अंदरुनी इलाकों में जनता की नाराजगी आंदोलन या हिंसा का रूप ले सकती है.
शनि मीन में वक्री है, जिसका असर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों पर गहरा होगा. कमजोर अर्थव्यवस्था और नाजुक संस्थागत ढांचा जनता को असंतुष्ट करेगा, लेकिन विरोध बिखरा हुआ और असंगठित रहेगा.
जनवरी 2026 में शनि की सीधी गति और राहु का मेष में प्रभाव सत्ता पर अंतिम आघात करेगा. नेपाल और पाकिस्तान में सरकार को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
मार्च 2026 में राहु मीन राशि की ओर बढ़ेगा, जिससे धार्मिक और वैचारिक आंदोलन तीखे होंगे. जुलाई 2026 में मंगल-शनि का संयोजन फिर से संघर्ष और युद्ध जैसी स्थिति बना सकता है.
चीन की भीतर की खामोशी बहुत कुछ बयां करेगी
चीन के लिए राहु का कुंभ में होना और शनि का मीन में होना दबाव और चुप्पी का मेल है. यह संयोजन जनता में असंतोष तो पैदा करता है, लेकिन वह खुलकर सामने नहीं आता. बेरोजगारी और सेंसरशिप के कारण आने वाले महीनों में चीन में साइलेंट प्रोटेस्ट उभर सकते हैं.
अमेरिका: अवसर की राजनीति
अमेरिका इन आंदोलनों को अपनी रणनीति में शामिल करेगा. लोकतांत्रिक आवाजों का समर्थन करके वह चीन और यूरोप की अस्थिरता को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगा. शास्त्रों का सूत्र है कि ग्रहणकाल में बाहरी शक्तियां हस्तक्षेप करती हैं. यही भूमिका अमेरिका निभाएगा. इसलिए भारत को अधिक सजग रहने की जरूरत है.
आने वाले महीने और साल या भविष्य की झलक
25 सितंबर-5 अक्टूबर 2025 चंद्र ग्रहण की प्रतिध्वनि भारत और नेपाल में छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ा सकती है. 18-19 अक्टूबर 2025 गुरु का कर्क में प्रवेश लोकहित और कल्याणकारी घोषणाएं करा सकता है.
21-31 अक्टूबर 2025 राहु-कुंभ का प्रभाव यूरोप में औद्योगिक और आर्थिक अवरोध का कारण बनेगा. नवंबर 2025 शनि और गुरु की स्थिति ऑडिट और जवाबदेही की बहस को तेज करेगा.
4-5 दिसंबर 2025 गुरु वक्री होकर मिथुन में लौटेगा जो सूचना युद्ध और मीडिया का ध्रुवीकरण करा सकता है. जनवरी 2026 शनि सरकार या बड़े नीति सुधारों में फेरबदल का कारण बन सकता है.
फरवरी-मार्च 2026 राहु-कुंभ प्रभाव से विचारधारात्मक टकराव और विश्वविद्यालयों में असंतोष देखने को मिल सकता है. जुलाई 2026 मंगल-शनि का प्रतिकूल योग कठोर कानून व्यवस्था और कूटनीतिक तनाव का कारण बनता दिख रहा है.
शास्त्र से क्या संकेत निकल रहे हैं?
बृहज्जातक के अनुसार चंद्र ग्रहण जनता की चेतना को जागृत करता है. भविष्य पुराण कहता है कि सूर्य ग्रहण सत्ता और राजा पर संकट लाता है. मुहूर्त चिंतामणि में लिखा है कि बुध की राशि में ग्रहण होने पर नीति और शिक्षा क्षेत्र में संकट आता है.
किशोर और युवा बड़े बदलाव में अहम भूमिका निभाते हैं. वहीं ग्रहलाघव बताता है कि लगातार ग्रहण होने पर राजनीतिक अस्थिरता और जन-आंदोलन निश्चित होते हैं.
सितंबर 2025 के ग्रहण केवल आकाशीय घटनाएं नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति की नई पटकथा हैं. नेपाल में युवाओं का आंदोलन और फ्रांस में Block Everything इस पटकथा के पहले दृश्य हैं.
आने वाले महीनों में भारत, पाकिस्तान और चीन भी इस ऊर्जा से प्रभावित होंगे. अमेरिका इस हलचल को अवसर की तरह देखेगा और अपनी स्थिति मजबूत करेगा. अमेरिका की चालें उजागर होंगी.
ग्रहों का स्पष्ट संदेश है कि पुरानी व्यवस्थाएं दरक रही हैं. जनता खड़ी होगी. 2026 तक सत्ता की जड़ें हिलेंगी और नई चेतना अपनी राह बना सकती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Source link
Discover more from Reelpedia
Subscribe to get the latest posts sent to your email.