शिमला के संजौली में मस्जिद को लेकर हिंदू संगठनों ने एक बार फिर विरोध जताया है. पिछले साल इसी दिन संजौली मस्जिद के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसमें पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था. इस साल भी हिंदू संगठनों के लोग संजौली मस्जिद के बाहर एकत्रित हुए और सरकार और वक्फ बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी की.
अर्ध पिंडदान के जरिए विरोध
आज सुबह (11 सितंबर) ग्यारह बजे 11 लोगों ने संजौली मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया. देव भूमि संघर्ष समिति के सह संयोजक विजय शर्मा ने बताया कि प्रशासन पिछले साल के आंदोलन से डर गया था. इस बार डिजास्टर एक्ट का हवाला देते हुए केवल 11 लोगों को धरना देने की अनुमति दी गई.
प्रदर्शनकारियों ने संजौली श्मशान घाट के आधे रास्ते में और सुक्खू सरकार के आधे कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए अर्ध पिंडदान किया. उनका कहना था कि यह अर्ध पिंडदान सनातन विरोधियों को अर्ध मुक्ति देने जैसा है.
विजय शर्मा ने कहा कि नगर निगम कोर्ट के आदेश के बावजूद वक्फ बोर्ड ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उनका कहना था कि यह सही नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज एकजुट हो चुका है और सनातन विरोधियों के खिलाफ आंदोलन लगातार जारी रहेगा.
आज सिर्फ 11 लोगों को प्रदर्शन की अनुमति मिली, लेकिन शर्मा ने यह भी कहा कि 11 लोगों की शक्ति कई गुणा होगी और हिंदुत्व का झंडा बुलंद रहेगा.
पिछले साल की घटना दिलाई याद
पिछले साल 11 सितंबर 2024 को भी संजौली मस्जिद के खिलाफ आंदोलन हुआ था. उस दौरान हिंदू संगठनों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. इस बार प्रदर्शनकारी उसी दिन को याद करते हुए सरकार और वक्फ बोर्ड के खिलाफ विरोध जताने के लिए जुटे.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार मस्जिद निर्माण को रोकने में नाकाम रहे हैं. उन्होंने कहा कि मस्जिद आधी अधूरी बनी हुई है और प्रशासन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया.
आंदोलन जारी रहने का ऐलान
विजय शर्मा ने कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. हिंदू संगठन संजौली मस्जिद के खिलाफ एकजुट हैं और आगे भी आंदोलन जारी रहेगा. उनका मानना है कि केवल छोटे प्रदर्शन से ही हिंदुत्व की आवाज बुलंद नहीं होती, बल्कि पूरी ताकत के साथ यह मुद्दा उठाया जाएगा.
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