सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सवाल किया कि कोई जानता है कि जजों की क्या स्थिति है. कितने घंटे वह काम करते हैं और कितने घंटे सो पाते हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार (24 सितंबर, 2025) उस मामले पर सुनवाई करते हुए यह बात कही है, जिसमें याचिका को तुरंत सूचीबद्ध करने की मांग की गई थी.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिल उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह भी मामले पर सुनवाई कर रहे थे. एडवोकेट शोभा गुप्ता ने बेंच को बताया कि राजस्थान में एक आवासीय मकान की आज नीलामी होगी और इसलिए मामले को आज ही सूचीबद्ध किया जाएगा. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह उस समय तक किसी मामले को उसी दिन तत्काल सूचीबद्ध करने का आदेश नहीं देंगे, जब तक कि किसी को फांसी न दी जा रही हो.
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘जब तक किसी को फांसी नहीं होने वाली हो, मैं किसी भी मामले को उसी दिन सूचीबद्ध नहीं करूंगा. आप लोग जजों की स्थिति नहीं समझते, क्या आपको पता भी है कि वे कितने घंटे काम करते हैं और कितने घंटे सोते हैं? जब तक किसी की स्वतंत्रता दांव पर न लगी हो, हम उसे उसी दिन सूचीबद्ध नहीं करेंगे.’
एडवोकेट शोभा गुप्ता के लगातार आग्रह करने पर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि नीलामी नोटिस कब जारी किया गया था. उन्होंने जवाब दिया कि नीलामी नोटिस पिछले हफ्ते जारी किया गया था और बकाया राशि के रूप में एक निश्चित राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है. जस्टिस सूर्यकांत ने एडवोकेट शोभा गुप्ता से कहा कि अगले कुछ महीनों तक मामले की सुनवाई की उम्मीद न करें. हालांकि, बाद में उन्होंने कोर्ट मास्टर से मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने के लिए कहा.
भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई (CJI BR Gavai) आमतौर पर ऐसे मामलों की सुनवाई करते हैं. वह पांच जजों वाली संविधान पीठ में बैठते हैं. प्रक्रिया के अनुसार जज किसी संवैधानिक पीठ के मामले में व्यस्त हों या अस्वस्थ हों तो दूसरे सबसे सीनियर जज मामलों को सूचीबद्ध करने पर सुनवाई करते हैं.
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