दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों के आरोपित शरजील इमाम ने शनिवार (6 अगस्त, 2025) को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया था. यह मामला नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा है. इमाम पर आरोप है कि वे दंगों के पीछे साजिशकर्ता थे.
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. यह याचिका दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है, जिसमें उन्हें जमानत नहीं दी गई थी. साथ ही सात अन्य आरोपियों की भी जमानत याचिकाएं खारिज की गई हैं. न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की पीठ ने इमाम सहित सात अन्य की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने 2022, 2023 और 2024 में दायर याचिकाओं पर 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
किनकी जमानत याचिकाएं हुईं खारिज?
शरजील इमाम, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा, अतहर खान, अब्दुल खालिद सैफी, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर और शादाब अहमद की जमानत याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की हैं. वहीं, तसलीम अहमद की जमानत याचिका जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने खारिज की.
अभियोजन पक्ष ने किया क्या दावा
अभियोजन ने अदालत में कहा कि ये दंगे अचानक नहीं हुए थे, बल्कि ये पहले से योजना बना कर किए गए थे. उन्होंने बताया कि यह एक “खतरनाक साजिश” थी और इसे सोच-समझकर अंजाम दिया गया था. शरजील इमाम, उमर खालिद सहित अन्य पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आरोप लगाए गए हैं. उन पर दंगों का “मास्टरमाइंड” होने का आरोप है. ये दंगे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़के थे. इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.
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